Showing posts with label nagendra prasad singh. Show all posts
Showing posts with label nagendra prasad singh. Show all posts

Friday, October 17, 2014

देखत मौत के अब लजाइल का बानी - नागेन्द्र प्रसाद सिंह

देखत मौत के अब लजाइल का बानी
जो जाहीं के बा, त तवाइल का बानी

करे के रहे जे, ऊ सब हो गइल बा
किनाने चहुँप के छछाइल का बानी

बहुत दूर उड़लीं अकासे-पताले
करीं थिर मन के हहाइल का बानी

बहुत दिन पटवलीं लगावल बगइचा
तजीं मोह-माया, सुखाइल का बानी

जे बा मोटरी माथ पर ओके फेंकीं
करीं मन हलुक अब दबाइल का बानी

हँकारत बा मउअत खड़ा हो दुआरे
दुबुक घर का भीतर लुकाइल का बानी